मत हार तूं
चला पतवार तूं
ओ मांझी रे
ओ साथी रे
तीर निकला कमान से
वापस कैसे जाएगा।
मार्ग पकड़ तूं एक बढ़ा चल
मंजिल ऐसे पाएगा।।
अब क्यूँ डरता है जब आया बीच मंझधार तूं,
मत हार तूं.........
सुख दुःख तो है
समय का चक्का।
एक जाएगा एक आएगा
बिना लगाए धक्का।।
दोनों में अब मेल बैठाकर आगे बढ़ एक बार तूं,
मत हार तूं.........
चीर दे लहरों को
ले भुजाओं का सहारा।
फिर देखूं मैं भी तुझको
कैसे ना मिलता किनारा।।
बाधाएं दूर भागे ऐसी भर हुंकार तूं,
मत हार तूं.........
मत हार तूं
चला पतवार तूं
ओ मांझी रे
ओ साथी रे
कवि शशि प्रकाश
संपर्क सूत्र:- 9799691367
चला पतवार तूं
ओ मांझी रे
ओ साथी रे
तीर निकला कमान से
वापस कैसे जाएगा।
मार्ग पकड़ तूं एक बढ़ा चल
मंजिल ऐसे पाएगा।।
अब क्यूँ डरता है जब आया बीच मंझधार तूं,
मत हार तूं.........
सुख दुःख तो है
समय का चक्का।
एक जाएगा एक आएगा
बिना लगाए धक्का।।
दोनों में अब मेल बैठाकर आगे बढ़ एक बार तूं,
मत हार तूं.........
चीर दे लहरों को
ले भुजाओं का सहारा।
फिर देखूं मैं भी तुझको
कैसे ना मिलता किनारा।।
बाधाएं दूर भागे ऐसी भर हुंकार तूं,
मत हार तूं.........
मत हार तूं
चला पतवार तूं
ओ मांझी रे
ओ साथी रे
कवि शशि प्रकाश
संपर्क सूत्र:- 9799691367



