हमको चाहिए आजादी, ये देश मांगे आजादी
चंद है मौकापरस्त और शेष मांगे आजादी
घुट घुट कर जीने वाले हर क्षण से आजादी
जातिवाद बढ़ाने वाले आरक्षण से आजादी
बहुत बरता संयम अब गिन गिन के लेंगे आजादी
जो तुम न दोगे आजादी तो छीन के लेंगे आजादी
ये आवाज केवल मेरी नहीं यह बोले गली मोहल्ला
आरक्षण तेरे टुकड़े होंगे इंशाअल्लाह इंशाअल्लाह
योग्यता खूंटे से बाँधी निकम्मे बने परिन्दा है
'प्रतिभा' हम शर्मिन्दा है तेरे कातिल जिन्दा है
गले पर छुरी हो या न हो हम बोलेंगे राम रहीम
पर संविधान में नहीं लिखा कि बोलो 'जय भीम'
कलम तू संघर्ष कर ये जनता तेरी आभारी रहेगी
वरना आरक्षण से आजादी तक ये जंग जारी रहेगी
ये कोई देशविरोधी नहीं, ये राष्ट्रहितैषी नारे है
बर्फ की सिल्ली से निकले ये धधकते अंगारे है
त्यागो इस सीढ़ी को और सफल बनो तुम कर्म से
भारत हमारी जाति है, हम भारतीय है धर्म से
मोदीजी अनुरोध मेरा जल्दी करो कोई फैसला
जातिगत ठेकेदारो को हटाओ हार्दिक हो या बैंसला
सोचा अब कुछ परिवर्तन होगा जब तुम विजेता बन गए
किन्तु तुम भी राजनीति के कीचड़ में पक्के नेता बन गए
वोटबैंक के दलदल में तुम भी ऐसे धंस गए
मंडल और कमंडल में तुम भी कैसे फंस गए
इस तरह से प्रतिभाओं का तोड़ो मत विश्वास
या फिर बदलो अपना नारा सबका साथ कुछ का विकास
जो नहीं मिली आजादी हमको तो प्रतिभा का पलायन होगा
स्वाद निकल जाएगा भोजन से हाथ मे केवल अजवायन होगा
देश के इन सपूतों से विदेशों में विकास का सागर बहता रहेगा
और आरक्षण से बने इंजिनीयरों का बनाया हर पुल ढहता रहेगा
आरक्षण एक रास्ता जिसकी मंजिल देश की बर्बादी
अब तो कहना मानो हमें लौटा दो हमारी आजादी
कवि शशि प्रकाश
संपर्क सूत्र 9799691367
देश के इन सपूतों से विदेशों में विकास का सागर बहता रहेगा
और आरक्षण से बने इंजिनीयरों का बनाया हर पुल ढहता रहेगा
आरक्षण एक रास्ता जिसकी मंजिल देश की बर्बादी
अब तो कहना मानो हमें लौटा दो हमारी आजादी
कवि शशि प्रकाश
संपर्क सूत्र 9799691367
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