Thursday, July 28, 2016

देखो देखो सत्ता आई

देखो देखो सत्ता आई
संग अपने खुशियां लाई 

पाँच साल गिन गिन काटे 
एक एक दिन दुर्दिन लागे 
करते रहे हम रोज विलाप 
अब करेंगे भोग विलास 
हर एक वोटर का तलवा चाटा 
शराब पिलाई नोट बांटा 
सेवक बनने का किया ढोंग 
देश भक्ति के गाए सोंग 
नापे हर दुकान और हर ठेले 
जाने कितने कितने पापड़ बेले 
तब जाकर मिला हमको शासन 
अब बनेंगे हम दुशासन 
कुर्सी आई बंगला आया 
लालबत्ती अलबत्ता आई 
देखो देखो सत्ता आई 

अब हम राजा भोज बनेंगे 
भ्रष्टाचार के नए खोज करेंगे 
डबल करेंगे अपनी पगार 
और खाकर नहीं लेंगे डकार 
गरीबों का निवाला लेंगे छीन 
क्योंकि आ गए हमारे अच्छे दिन 
अब स्विस बैंक में खाता होगा 
जिसमे पेटी खोखा जाता होगा 
कुर्सी पर हमको जमना होगा
और घोटाला सौ करोड़ से कम ना होगा 
अपनों में रेवड़ियां हम खुद बाँटेंगे 
अपना थूका हुआ हम खुद चाटेंगे 
पाँच साल मार रहे थे मक्खियां 
अब हमारी भी महत्ता आई 
देखो देखो सत्ता आई 

देखो देखो सत्ता आई 
संग अपने खुशियां लाई 


कवि शशि प्रकाश 
संपर्क सूत्र 9799691367

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