साहिल जैसा पत्थर बनकर झेल रहा मैं लहरों को I
मैं तो हूँ उस गाँव के जैसा जो रोक रहा है शहरों को I
अमृत कहीँ खो गया है अब तो विषो का बोलबाला है,
इस विष की काठ मे देखो खोज रहा मैं जहरों को I
टुकड़े टुकड़े हो गए दिल के जीऊं मैं कैसे इतना बता I
क्या हुई है गलती मुझसे हुई मुझसे कैसी खता I
भुलवा दे सारे बीते मंजर भुलवा दे सारे गमो को,
इतना रहम करना मुझपे तूं मौला करना इतनी अता I
रावण और कंस मे मंजूर कौन है I
यहाँ सब कोयले, कोहिनूर कौन है I
गुनाह किसने किया बस यही जानना है तुम्हे,
मुझे परवाह इसकी कि बेकसूर कौन हैI
अपने रूह के हर कतरे को इस मिट्टी की महक से तोल दो I
जब हिन्द की शान मे चले पुरवाई तो दिल का हर द्धार खोल दो I
गर्दन पर रखी छूरी से भी जब न कह सको भारत माता की जय,
तो दिल से नफरत की छूरी हटाकर भारत अम्मी की जय बोल दो I
मैं राही बन जाता हूँ तुम मंजिल हो जाओ I
मेरे गीत और ग़ज़लों की तुम महफ़िल हो जाओ I
आसानी से पा लू तुझे तो कैसी वो फिर प्रेम कहानी,
एक काम करो तुम मेरी खातिर थोड़ा मुश्किल हो जाओ I
कवि शशि प्रकाश
संपर्क सूत्र 9799691367
मैं तो हूँ उस गाँव के जैसा जो रोक रहा है शहरों को I
अमृत कहीँ खो गया है अब तो विषो का बोलबाला है,
इस विष की काठ मे देखो खोज रहा मैं जहरों को I
टुकड़े टुकड़े हो गए दिल के जीऊं मैं कैसे इतना बता I
क्या हुई है गलती मुझसे हुई मुझसे कैसी खता I
भुलवा दे सारे बीते मंजर भुलवा दे सारे गमो को,
इतना रहम करना मुझपे तूं मौला करना इतनी अता I
रावण और कंस मे मंजूर कौन है I
यहाँ सब कोयले, कोहिनूर कौन है I
गुनाह किसने किया बस यही जानना है तुम्हे,
मुझे परवाह इसकी कि बेकसूर कौन हैI
अपने रूह के हर कतरे को इस मिट्टी की महक से तोल दो I
जब हिन्द की शान मे चले पुरवाई तो दिल का हर द्धार खोल दो I
गर्दन पर रखी छूरी से भी जब न कह सको भारत माता की जय,
तो दिल से नफरत की छूरी हटाकर भारत अम्मी की जय बोल दो I
मैं राही बन जाता हूँ तुम मंजिल हो जाओ I
मेरे गीत और ग़ज़लों की तुम महफ़िल हो जाओ I
आसानी से पा लू तुझे तो कैसी वो फिर प्रेम कहानी,
एक काम करो तुम मेरी खातिर थोड़ा मुश्किल हो जाओ I
कवि शशि प्रकाश
संपर्क सूत्र 9799691367
No comments:
Post a Comment