Monday, May 21, 2018

अधूरा अधूरा सा।

मुस्कुराती घटाएँ, महकती फिजाएं।
जरा जाके उसको ये याद दिलाये।।
कि कोई तेरे बिन अधूरा अधूरा सा.........

मेरे लबों पर हर घड़ी तेरा नाम आता।
धुंधली धुंधली तेरी झलक से भी आराम आता।
मैं खड़ा दूर तेरे साये से जब भी निहारूं,
पिघलाकर दूरियों को तेरा सलाम आता।
क्यूँ शरमाए, कितना छुपाएं।
ये निगाहें, कह ना पाएं।।
कि कोई तेरे बिन अधूरा अधूरा सा.........

शहद हो कि मिश्री जैसी या गुड़ की डली हो तुम।
कहूँ तुझको खिलता गुलाब या कि कोई कली हो तुम।
तेरी नटखट नज़रों को जब पकड़ा तो ये जाना कि,
तुझ जैसा पगला हूँ मैं और मुझ जैसी पगली हो तुम।
चंदा, सितारे, कबूतर, हवाएं।
कोई तो जाए, तुझे ये बताये।
कि कोई तेरे बिन अधूरा अधूरा सा.........

मुस्कुराती घटाएँ, महकती फिजाएं।
जरा जाके उसको ये याद दिलाये।।
कि कोई तेरे बिन अधूरा अधूरा सा.........

(शशि प्रकाश)

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